ताना बाना | 13.08.2009
जब बंट गया था बर्लिन
पूर्वी जर्मनी के तत्कालीन नेता वाल्टर उल्ब्रिष्ट ने कहा था कि बर्लिन में शहर के बीचोबीच एक दीवार बनाने का किसी का इरादा नहीं है. और उसके चंद ही दिन बाद ठीक 48 साल पहले 13 अगस्त, 1961 को रातोंरात दीवार बनाकर शहर को दो टुकड़ों में बांट दिया गया. पूर्वी जर्मन जनता के लोकतांत्रिक आंदोलन के बाद 20 साल पहले यह दीवार ढह गई.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: जब दीवार ढह गई
24 साल से भी अधिक समय तक यह दीवार जर्मनों को बांटती रही. दीवार लांघकर पश्चिम की ओर भागने की कोशिश में पूर्वी जर्मनी में अनेक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इनमें से 136 लोगों के नाम मालूम हैं, लेकिन माना जाता है कि जीडीआर की सीमारक्षकों की गोलियों से कम से कम 206 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से अधिकतर 18 से 30 साल की उम्र के नौजवान थे, आठ महिलाएं थीं.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: पश्चिम की ओर भागता पूरब का सैनिकआज राजधानी बर्लिन में दीवार की 48वीं सालगिरह के अवसर पर शहर के महापौर क्लाउस वोवेराइट व पूर्वी जर्मन जासूसी विभाग के दस्तावेज़ों के लिए विशेष प्रभारी मारियाने बिर्थलर ने बैर्नाउअर श्ट्रासे के स्मारक पर माल्यार्पण किया. इससे पहले रेडियो के साथ एक साक्षात्कार में मारियाने बिर्थलर ने इस दिन की याददाश्त बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि लेकिन अगर हम तय भी कर लें, कि ये बीती हुई बातें हैं, लोग इसे भुला नहीं पाएंगे. ऐसे लोगों की संख्या काफ़ी अधिक है, जिन्हें दीवार बनाने का वह दिन और उसके बाद बंटवारे के साल याद हैं. यह इतिहास का हिस्सा है, जो हमारे साथ है, और यह बेहतर होगा कि हम उसे याद रखें.
बर्लिन के महानगर प्रमुख क्लाउस वोवेराइट ने इस अवसर पर दीवार के शिकारों की संख्या के सिलसिले में छिड़े विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मृतकों की संख्या पर निर्भर नहीं करता कि जीडीआर में एक तानाशाही थी.
रिपोर्ट: उज्ज्वल भट्टाचार्य
संपादन: महेश झा
























